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15.07.2026 06:08 AM
डॉलर ने आक्रामक रुख अपनाया

कहा जाता है कि निकले हुए शब्द वापस नहीं लिए जा सकते, और फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर (Christopher Waller) के हालिया बयान ने इस कहावत को सही साबित कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि महंगाई के आगामी आंकड़े कीमतों पर मजबूत दबाव (Firm Price Pressures) दिखाते हैं, तो ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Rate Hike) पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनके इस बयान के बाद EUR/USD मुद्रा जोड़ी गिरकर दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई।

वॉलर ने बताया कि कोर महंगाई (Core Inflation) दिसंबर में 3.0% से बढ़कर मई में 3.4% हो गई है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महंगाई में यह तेजी ईरान युद्ध के कारण मार्च में ऊर्जा कीमतों में आई उछाल से पहले ही शुरू हो चुकी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि वह 2021 की गलती दोहराना नहीं चाहते, जब फेड ने बढ़ती महंगाई पर प्रतिक्रिया देने में बहुत देर कर दी थी। यदि इस सप्ताह आने वाले महंगाई के आंकड़े भी उम्मीद से अधिक गर्म (Hot Inflation Data) रहते हैं, तो फेड को निकट भविष्य में मौद्रिक नीति (Monetary Policy) को और सख्त करने पर विचार करना पड़ेगा।

हालांकि, वॉलर ने यह भी माना कि श्रम बाजार (Labor Market) अब 2022–2023 के सख्त मौद्रिक नीति वाले दौर की तुलना में काफी कम गर्म है। उनके अनुसार, इससे बिना अत्यधिक कठोर कदम उठाए भी महंगाई को नियंत्रित करने का एक उचित अवसर (Valid Argument) मिलता है। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि पुष्टि का इंतजार करते रहना भी सही रणनीति नहीं है। यदि निवेशकों का यह भरोसा खत्म हो जाता है कि महंगाई धीरे-धीरे कम हो रही है, तो फेड को बाद में कहीं अधिक आक्रामक तरीके से कार्रवाई करनी पड़ सकती है।

इसी तरह की राय TS Lombard भी रखता है। उसके अनुसार, फेड को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ रहे निवेश और उछाल को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को और सख्त करना चाहिए, क्योंकि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था दो अलग-अलग गति वाली (Dual Economy) बनती जा रही है। संस्था का मानना है कि उधारी की लागत (Borrowing Costs) में बढ़ोतरी CME डेरिवेटिव्स मार्केट की मौजूदा अपेक्षाओं से कहीं अधिक तेज़ हो सकती है।

फेड की ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं में बदलाव (Dynamics of Market Expectations for Fed Rates)

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फ्यूचर्स बाजार (Futures Market) ने इन घटनाक्रमों पर पहले ही प्रतिक्रिया दे दी है। CME Group के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में फेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाए जाने की संभावना महीने की शुरुआत में 18% से बढ़कर 42% हो गई है। वहीं, साल के अंत तक दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी (Restrictive Moves) की संभावना 34% से बढ़कर 56% तक पहुंच गई है।

अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई सैन्य झड़पों तथा ब्रेंट कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत बढ़कर 87 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से महंगाई संबंधी चिंताएं और तेज हो गई हैं। इसके अलावा, वॉशिंगटन ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है और वहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए ट्रांजिट शुल्क (Transit Fee) की मांग की है, जिससे बाजार की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

दूसरे केंद्रीय बैंक भी पीछे नहीं हैं। ट्रेडर्स अब सितंबर तक बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) द्वारा 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की ब्याज दर बढ़ोतरी की पूरी संभावना मान रहे हैं। इसी तरह की बढ़ोतरी की उम्मीद यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) से भी की जा रही है।

यदि प्रमुख केंद्रीय बैंक एक साथ मौद्रिक नीति को सख्त करते हैं, तो उनके बीच नीतिगत अंतर (Policy Divergence) कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि, EUR/USD मुद्रा जोड़ी की दिशा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका अब भी फेड की कार्रवाई की गति निभाएगी।

बैंक ऑफ इंग्लैंड और यूरोपीय सेंट्रल बैंक की ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाओं में बदलाव (Dynamics of Market Expectations for Bank of England and ECB Rates)

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हालांकि, अमेरिकी डॉलर के सामने एक छिपा हुआ जोखिम भी मौजूद है। अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट (Apollo Global Management) ने चेतावनी दी है कि डॉलर की मौजूदा मजबूती काफी हद तक विदेशी निवेशकों द्वारा अमेरिकी टेक्नोलॉजी शेयरों में किए जा रहे पूंजी निवेश पर निर्भर है। इनमें से अधिकांश विदेशी निवेशक मुद्रा विनिमय जोखिम (Currency Risk) से बचाव के लिए हेजिंग (Hedging) नहीं करते।

यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ा मौजूदा निवेश उछाल या AI बबल फूट जाता है, तो विदेशी निवेशकों की पूंजी तेजी से अमेरिकी बाजार से बाहर निकल सकती है। इस तरह का पूंजी बहिर्वाह (Capital Outflow) अमेरिकी डॉलर के लिए एक गंभीर जोखिम साबित हो सकता है और उसकी मजबूती पर बड़ा दबाव डाल सकता है।

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यह एक विरोधाभासी स्थिति (Paradox) पैदा करता है। एक ओर अमेरिकी डॉलर फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी (Fed Tightening) की उम्मीदों के कारण मजबूत हो रहा है, और दूसरी ओर वही उम्मीदें AI क्षेत्र में आए उछाल (AI Boom) से पैदा हुई हैं, जो भविष्य में डॉलर की सबसे बड़ी कमजोरी (Achilles' Heel) भी बन सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अमेरिकी डॉलर अपनी मजबूती के लिए विदेशी निवेशकों पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो गया है?

तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) के अनुसार, दैनिक (Daily) चार्ट पर EUR/USD मुद्रा जोड़ी 1.1360–1.1370 के फेयर वैल्यू रेंज (Fair Value Range) की निचली सीमा तक पहुंच गई है। यदि अगले एक-दो दिनों में यह जोड़ी इस स्तर के नीचे निर्णायक रूप से नहीं टूटती (Breakout नहीं होता), तो इसे खरीदारी (Buy) का एक संभावित संकेत माना जा सकता है।

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